- तेरे एहसान का बदला
- ऐसा दो वरदान के
- बाजी बाजी रे
- यह तो सच है कि नवकार में
- शीतल है तुं मुझे
- जब जब दिल ये
- सेवा पूजा कर नहीं
- किसने सजाया तेरा
- दुनिया से मैं हरा
- बिलकुल बगल में मकान
Wednesday, 26 May 2021
INDEX
135. ऐसा दो वरदान / Aisa do varadaan
135. ऐसा दो वरदान...
ऐसा दो वरदान के दादा...2, फिर न जन्म दुबारा हो
फिर भी जन्मुं मेरे सिर पे, दादा हाथ दुम्हारा हों
इस जीवन में इतनी इच्छा..2 हरदम थे साथ दुग्हारा हो.
ओर जब मैं जन्युं मेरे ज्िर पे, दादा हाथ दुग्हारा हो
1. उस आंगन में गूंजे दादा, मेरी पहली किलकारी
आँखें खोंलू हो तुं सामने, तेरी छवी प्यारी-प्यारी
सबसे पहले इन आँखों को...2, दादा दीदार तुम्हारा हो... जब मैं
2. मात-पिता हो ऐसे मेरे, रोज तेरे मंदिर जाए
और मेरी उँगली पकड़ के मुझको, तेरा दर्शन करवाए
सुबह-सुबह मुझको मेरे दादा...2,बस तेरा ही नज़ारा हो... जब मैं
3. तेरे नाम की सड़क पे दादा, एक छोटासा घर मेरा हो
आस-पढ़ोसी मेरे दादा, सच्चे भक्त तुम्हारे हो
मेरे गलि के मोड़ पे दादा..2 एक भव्य जिनालय तुम्हारा हो... जब में
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